Best Essay on Air Pollution in Hindi | वायु प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

विभिन्न परीक्षाओं में वायु प्रदूषण पर निबंध लिखने को आता हैं। हम आपकी मदद के Essay on Air Pollution in Hindi में लेकर आये है।

वायु प्रदूषण वर्तमान परिदृश्य में बहुत ही बड़ी समस्या बनता चला जा रहा है जिसके निवारण के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना चाहिए।

इस निबंध के माध्यम से हम आपको यह बताएंगे कि वायु प्रदूषण पर निबंध कैसे लिखें? प्रदूषण क्या है विभिन्न प्रकार के वायु प्रदूषण और वायु प्रदूषण के विभिन्न कारणों का वर्णन करें? वायु के हानिकारक तत्व क्या क्या है? वायु प्रदूषण क्या है इसके कारण एवं निवारण? एवं वायु प्रदूषण एवं इसके समस्या से संबंधित विभिन्न प्रश्नों के उत्तर।

वायुमंडल में विभिन्न गैसों एवं विशिष्ट प्राकृतिक द्वारा प्रदत्त अनुपात में उपस्थित है। जब इन गैसों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है तब हम कह सकते हैं कि वायु प्रदूषित हो गई है। वायु प्रदूषण की एक स्थिति यह भी हो सकती है कि हमारे वायुमंडल में ऐसे कण अधिक संख्या में व्याप्त हो जाए जो कि स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

ये कण औद्योगिक संस्थानों से विसर्जित होने वाले रासायनिक पदार्थों के भी हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त वायु में विभिन्न रोगों को फैलाने वाले जीवाणु या रोगाणुओं का विद्यमान होना भी वायु प्रदूषण का ही लक्षण है सामान्य रूप से यह भी कहा जा सकता है कि वायु में दुर्गंध एवं विभिन्न प्रकार की अशुद्धियों का व्याप्त हो जाना ही प्रदूषण है।

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Short & Long Essay on Air Pollution in Hindi | वायु प्रदूषण पर निबंध तथा टिप्पणी

यह Essay on Air Pollution in Hindi लगभग 2500 Words में लिखा गया है। जिसे आप अपनी आवश्यकताओं के अनुसार 350 शब्द, 250 शब्द, 400 शब्द, आदि छोटा या बड़ा बना सकते हैं।

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वायु प्रदूषण पर निबंध कैसे लिखें?

यदि आपको वायु प्रदूषण पर निबंध हिंदी में लिखना सीखना है तो नीचे दिए गए बिंदुओं का अनुसरण करके आप एक उच्च कोटि का वायु प्रदूषण पर निबंध लिख सकते हैं अथवा हमारे द्वारा लिखे गए वायु प्रदूषण के निबंध से आप कुछ सुझाव ले सकते हैं।

वायु प्रदूषण पर निबंध की भूमिका लिखें।

शुरुआत के 2 या 3 लाइन में वायु प्रदूषण के बारे में सूक्ष्म रूप से बताएं।

प्रस्तावना या भूमिका में से किसी एक को लिखें ।

यदि आप भूमिका लिख चुके हैं तो प्रस्तावना को मत लिखिए या आप प्रस्तावना को लिखकर भूमिका ना लिखें।

वायु प्रदूषण की परिभाषा तथा इसके बारे में बताएं।

वायु प्रदूषण की परिभाषा तथा वायु प्रदूषण को विस्तार से समझाएं।

वायु प्रदूषण के कारण तथा वायु प्रदूषण के कारक को लिखें।

वाइट दूषण के कारण को स्पष्ट करने के साथ-साथ इसके कारक को भी स्पष्ट करें।

वायु प्रदूषण के निवारण को लिखें।

प्रदूषण से होने वाली समस्या के निवारण के बारे में लिखें।

उपसंहार या निष्कर्ष को लिखें ।

अंत में आप अपने लिखे हुए संपूर्ण निबंध के उपसंहार या निष्कर्ष को कम से कम 3 या 4 लाइन में लिखकर अपने निबंध को समाप्त करें अंत में एक अच्छा सा पर्यावरण से संबंधित सुझाव को भी लिखें।

Essay On Air Pollution in Hindi | वायु प्रदूषण पर निबंध प्रस्तावना एवं उपसंहार सहित

प्रस्तावना :-

इस पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव कुछ समय तक बिना भोजन की जीवित रह सकते हैं परंतु वायु के बिना यह सारे जीव कुछ क्षण भी जीवित नहीं रह सकते। यह साधारण तथ्य हमें यह बताता है कि स्वच्छ वायु हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है।

वायु कई गैसों मिश्रण से बनता है। आयतन के अनुसार इस मिश्रण का लगभग 78% भाग नाइट्रोजन तथा लगभग 21% ऑक्सीजन है। कार्बन डाइऑक्साइड,मीथेन, आर्गन तथा तथा जल वाष्प भी अल्प मात्रा में उपस्थित है।

वायु जो गैसों के मिश्रण से मिलकर तैयार होता है यदि इस मिश्रण की मात्रा कम या ज्यादा हो जाने पर वायु हानिकारक एवं दूषित हो जाता है जो जीव जंतु पेड़ पौधों के लिए हानिकारक होता है।

वायु प्रदूषण की परिभाषा :-

सर हेनरी पिकंस के अनुसार – बाह्य पर्यावरण में धूल,धुंआ, गैस,तुषार,गंध एवं वाष्प में से एक या अधिक प्रदूषकों की हानिकारक मात्रा एवं दीर्घ अवधि तक उपस्थित जो मनुष्य,जानवरों पेड़ पौधों एवं संपत्ति के लिए घातक हो अथवा तर्कहीन ढंग से जीवन और संपत्ति के आनंदमय उपभोग में बाधक हो वायु प्रदूषण कहलाता है।

वायु प्रदूषण का अर्थ :-

वायु प्रदूषण समस्त पृथ्वी के प्राणी जगत के लिए एक बहुत बड़ा अभिशाप है। वायु हमारे जीवन के लिए एक आवश्यक तत्व है। जब हम सांस लेते हैं तो हम वायु को अंदर लेते हैं तथा वायु से ऑक्सीजन शरीर में जाता है और नाइट्रोजन बाहर निकाल दिया जाता है जिससे शरीर में रक्त दाब बराबर बना रहता है।

इससे किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होती है परंतु जब वायु में अनेक विषय ली कैसे मिली होती है तो सांस लेने तो सांस लेने पर ये विषैली गैसें हमारे शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाती है अर्थात प्रदूषित वायु हमारे जीवन के लिए बहुत ही हानिकारक होता है ।

वायु की अशुद्धियां :-

हमारी वायु में विभिन्न क्रियाओं के परिणामस्वरूप दो प्रकार के अशुद्धियाँ उत्पन्न होती हैं। प्रथम प्रकार की अशुद्धियां गैसीय होती है तथा दूसरे प्रकार की ठोस या लटकने वाली। इन दोनों प्रकार की अशुद्धियों का विवरण निम्नवत है :-

  • गैसीय अशुद्धियां :- वायु स्वयं में विभिन्न गैसों का मिश्रण मात्र है। हमारे पर्यावरण में विभिन्न क्रियाओं के फलस्वरूप विभिन्न गैसें बनती रहती है। इस प्रकार की मुख्य गैस है- कार्बन डाइऑक्साइड,कार्बन मोनोऑक्साइड,क्लोरीन,सल्फर डाइऑक्साइड,हाइड्रोक्लोरिक एसिड अमोनिया आदि। इनमें से कुछ गैसें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तथा कभी-कभी अधिक घातक भी होती है।
  • ठोस अथवा फैलने वाली अशुद्धियां :- यद्यपि वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है, परंतु कुछ हल्के ठोस पदार्थ भी वायुमंडल में विद्यमान रहते हैं। इन्हें वायु की ठोस अशुद्धियां कहा जाता है। उसको देखा भी जा सकता है क्योंकि ये ठोस कण वायु में अनंत संख्या में सदैव तैरती रहते हैं।
    • वायु में इस प्रकार की ठोस अशुद्धियां दो प्रकार की होती हैं। प्रथम प्रकार की जैविक अशुद्धियां होती है।
    • दूसरे प्रकार की अशुद्धियां फैलाने वाली निर्जीव या अजैविक अशुद्धियां होती है जो विभिन्न प्रकार की कणों के रूप में होती है। मिट्टी, धूल, रेत आदि के हल्के कणों के अतिरिक्त वनस्पतियों के कण, धागे लकड़ी आदि के महीन कर इस प्रकार की अशुद्धियों को जन्म देते हैं।
    • विभिन्न फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं के साथ कोयले के महीन कण भी वायु में घुल मिल जाते हैं। इसी प्रकार अन्य अनेक धातुओं के कण वायुमंडल में अशुद्धियों के रूप में व्याप्त रहते हैं। वायु की ये अशुद्धियां हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होती हैं।

वायु को प्रदूषित करने वाले कारक :-

वायु विभिन्न अशुद्धियों के कारण अशुद्ध हो जाती है। वायु को प्रदूषित करने वाले मुख्य कारकों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है –

  • श्वसन- क्रिया द्वारा :- वायु का सर्वाधिक उपयोग श्वसन क्रिया के लिए होता है। समस्त जीवित प्राणी आजीवन श्वसन क्रिया करते रहती हैं। श्वसन क्रिया द्वारा समस्त प्राणी वायुमंडल की ऑक्सीजन का सेवन कर लेते हैं तथा बदले में कार्बन  छोड़ते रहते हैं।
  • इस क्रिया के परिणामस्वरूप वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है जिससे वायु अशुद्ध हो जाती है। घनी बस्तियों में वायु प्रदूषण का कारण अधिक प्रभावकारी होता है।
  • विभिन्न पदार्थों के जलने से :- हमारे दैनिक जीवन में विभिन्न वस्तुओं अथवा पदार्थों को जलाना अति आवश्यक होता है। हम लकड़ी, कोयला, गैस, तेल, तथा अन्य अनेक पदार्थ जलाते रहते हैं। जिनके जलने में ऑक्सीजन इस्तेमाल होती है।
  • इससे वायु में ऑक्सीजन की मात्रा घटती है। प्रत्येक पदार्थ के जलने के परिणामस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड गैस भी पर्याप्त मात्रा में उत्पन्न होती है इससे वायु के मिश्रण का संतुलन बिगड़ जाता है तथा वायु अशुद्ध हो जाती है। जलने की क्रिया से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी कुछ  विषैली गैसें भी उत्पन्न होती है जो वायु को प्रदूषित करती है।
  • व्यावसायिक अशुद्धियां :- वर्तमान युग औद्योगीकरण का युग है। हर ओर बड़े बड़े उद्योग एवं कल कारखाने स्थापित किए जा रहे हैं। इन उद्योगों में अनेक प्रकार के रासायनिक क्रियाएं होती हैं, जिनमें अनेक प्रकार के विषैली गैसें तथा गंदगी उत्पन्न होती रहती हैं। ये समस्त गैस वायुमंडल में ही व्याप्त होती रहती हैं तथा वायुमंडल इन सबसे दूषित होता रहता है।
  • भिन्न भिन्न प्रकार की उद्योग भिन्न भिन्न प्रकार की अशुद्धियां वायुमंडल में कि छोड़ते रहते हैं।  उप्रयुक्त विवरण के द्वारा यह स्पष्ट है कि विभिन्न कारणों से वायु अशुद्ध होती रहती है। अशुद्ध वायु में ऑक्सीजन की मात्रा शुद्ध वायु की अपेक्षा घट जाती है कार्बन डाइऑक्साइड, कुछ अन्य गैसों का विजातीय तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है।

प्रदूषित वायु का स्वास्थ्य पर प्रभाव :-

यह तो सभी जानते हैं कि शुद्ध वायु हमारे स्वास्थ्य के लिए सहायक एवं लाभदायक होती है। इसके विपरीत प्रदूषित वायु हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है। लंबे समय तक अशुद्ध वायु में सांस लेते रहने से अनेक रोग हो सकते हैं। यदि व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में अशुद्ध वायु नहीं मिलती तो उसकी आयु घट सकती है तथा मृत्यु भी हो सकती है।

अशुद्ध वायु हमारे फेफड़ों को दूषित करते है। इससे हमारे शरीर में अनेक विजातीय तत्व एकत्रित होने लगते हैं तथा हमारी पाचन -क्रिया भी अस्त – व्यस्त होने लगती है। प्रदूषित वायु हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। व्यक्ति  वायु का निरंतर सेवन करने से चिड़चिड़ा भी हो जाता है। ऐसे व्यक्ति कोई भी कार्य ठीक से नहीं कर पाता  तथा  प्रायः बेचैन रहता है।

प्रदूषित वायु से फैलने वाले रोग :-

हम जानते हैं कि प्रदूषित वायु में ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है। इससे वायु में रोगों के कीटाणु बढ़ने लगते हैं। यह कीटाणु ही अनेक रोगों को फैलाने का कार्य करते हैं। प्रदूषित वायु के सेवन से फैलने वाले रोगों का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है –

  • साँस द्वारा फैलने वाले रोग :- सभी जीव श्वसन क्रिया के द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड गैस को वायुमंडल में छोड़ते रहते हैं। इस अशुद्ध वायु को सेवन करने से व्यक्तियों को घुटन का अनुभव होने लगता है तथा सिरदर्द, चक्कर आना, भारीपन आदि की शिकायत हो जाती है ।
  • वस्तुओं के सड़ने से हुई अशुद्ध वायु से रोग :- विभिन्न वस्तु जो सूखने तथा जलने से भी वायु अशुद्ध करते  है। इस क्रिया में वायु में दोनों प्रकार की अशुद्धियां अर्थात ठोस तथा गैस में व्याप्त हो जाती है। इस प्रकार अशुद्ध वायु में सांस लेने से भी विभिन्न रोग लग सकते हैं, जिसमें मुख्य है – भूख का न लगना, अतिसार, अजीर्ण, सिरदर्द, भारीपन तथा चक्कर आना।
  • धूल कणों से युक्त वायु से रोग :- धूल कणों की अधिकता से भी वायु दूषित हो जाती है। इस प्रकार की अशुद्ध वायु में सांस लेने से मुख्य रूप से सांस के रोग अर्थात दमा के अतिरिक्त आँख,गले तथा कानों के रोग भी हो सकते हैं।
  • औद्योगिक अशुद्धियां वायु से रोग :- वर्तमान समय में वायु को अशुद्ध बनाने में औद्योगिक संस्थाओं का मुख्य हाथ है। इनके द्वारा अनेक प्रकार की विषैली गैस एवं विषैले पदार्थों के अवशेष निरंतर वायुमंडल में व्याप्त होते रहते हैं। इस प्रकार की अशुद्धियां अनेक प्रकार के रोगों का कारण बनती है।
  • सांस के रोग,फेफड़ों के रोग, तपेदिक खांसी, कुकुर खांसी, बुखार तथा अनेक गंभीर रोग इस प्रकार की अशुद्धि वायु से ही होते है उसे ही खेलते हैं।
  • उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि अशुद्ध वायु से अनेक प्रकार के रोग फैल सकते हैं जो हमारे जीवन के लिए घातक भी सिद्ध हो सकते हैं वास्तव में सुनवाई हुई हमारे जीवन का आधार है हमें चाहिए कि हम अधिक से अधिक शुद्ध वायु का सेवन करें तथा वायु को दूषित होने से बचाने का भरसक प्रयास कर रही है।

वायु प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव :-

वायु प्रदूषण का जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इस प्रभाव को संक्षिप्त में आगे की तालिका में दर्शाया गया है :- 

वायु  प्रदूषकजन – स्वास्थ्य पर प्रभाव
सल्फर डाइऑक्साइडफेफड़ों के ऊतकों का प्रभाव, पुरानी खांसी का रोग।
नाइट्रोजन के ऑक्साइडफेफड़ों का कैंसर, इन्फ्लूएंजा के प्रति प्रतिरोधक शक्ति में कमी।
कार्बन मोनोऑक्साइडमस्तिष्क पर कुप्रभाव, सोचने विचारने की शक्ति में कमी।
सूक्ष्म कण
(क) कैडमियम व शीशा          (ख)राख, कालिख व धुंआ
रक्तचाप में वृद्धि, रुधिर में अधिक मात्रा के कारण मृत्यु व कम मात्रा के कारण तंत्रिका तंत्र तथा गुर्दों पर कुप्रभाव। नेत्रों में जलन व अन्य रोग, फेफड़ों के कैंसर की संभावना।
क्लोरोफ्लोरोकार्बनवायुमंडल की ओजोन की परत में छिद्र कर रहा है, जिससे पराबैगनी किरण सूर्य का प्रकाश अधिक मात्रा में पृथ्वी पर पहुंचकर कैंसर जैसे असाध्य रोगों की उत्पत्ति का कारण बन रही है।
वायु प्रदूषण से प्रभावित जनजीवन

प्रदूषित वायु को कैसे शुद्ध करें या  वायु प्रदूषण के निवारण :- 

जीवन मात्र के लिए शुद्ध वायु नितांत आवश्यक है। वायु के अभाव में हमारा जीवन असंभव है। हम केवल शुद्ध भाई से ही स्वस्थ रह सकते हैं। अतः वायु को शुद्ध करने का प्रयास करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य हो जाता है वैसे तो प्रकृति में भी वायु के शुद्धिकरण की अनेक क्रियाएं चलती रहती है।

यही कारण है कि लाखों वर्ष से अशुद्ध होने वाला वायुमंडल आज भी इतना शुद्ध है कि हम आराम से सांस ले रहे हैं परंतु जब वायु को दूषित करने वाले कारक अधिक हो जाते हैं तब वायु शुद्ध करने के लिए मनुष्य को कृत्रिम प्रयास करने पड़ते हैं।

इस प्रकार स्पष्ट है कि वायु के शुद्धिकरण की क्रिया दो प्रकार से चलती रहती है अर्थात वायु को शुद्ध करने वाले दो मुख्य साधन है। प्रथम प्रकार के साधनों को प्राकृतिक तथा दूसरे प्रकार को कृत्रिम कहा जाता है। दोनों प्रकार के साधनों का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है –

  • प्राकृतिक साधन :- प्रकृति में ही अनेक ऐसे अनेक साधन है जो निरंतर वायु को शुद्ध करते रहते हैं। मुख्य रूप से पेड़ पौधे सूर्य के प्रकाश वर्षा वायु की ऑक्सीजन तेज गति से चलने वाली हवाओं वितरण आदि के द्वारा वायु शुद्ध होती रहती है वायु को शुद्ध करने वाले इन प्राकृतिक संसाधनों का संक्षिप्त परिचय निम्नवत है –
    1. पेड़ पौधे :- वायु को शुद्ध करने वाले मुख्य प्राकृतिक साधन पेड़ पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण कर लेते हैं तथा सूर्य के प्रकाश के प्रभाव से ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इस क्रिया से जहां एक और वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा घटती रहती है वहीं दूसरी और ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि होती है।
    2. सूर्य का प्रकाश :- वायु को शुद्ध करने में सूर्य के प्रकाश का भी विशेष योगदान है। सूर्य के प्रकाश में बहुत अधिक गर्मी या ताप होता है। इस गर्मी से अनेक अशुद्धियां निरंतर नष्ट होती रहती हैं। वायु में लटकने वाली बहुत सी अशुद्धियां सूर्य की गर्मी में भस्म हो जाती है तथा वायु में पाए जाने वाले विभिन्न रोगों के कीटाणु भी मर जाते हैं। वायु में होने वाली जलवाष्प का अधिक होना भी सूर्य की गर्मी से कम होता रहता है। वस्तुओं के सड़ने गलने से उत्पन्न होने वाली सब्जियां तथा दुर्गंध पूर्ण गैसें भी सूर्य के प्रकाश एवं गर्मी से नष्ट हो जाती है। इसलिए सामान्य रूप से मकान बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि घर में सूर्य का प्रकाश अनिवार्य रूप से आ सके।
    3. वर्षा :-  वायु को शुद्ध करने वाला एक प्राकृतिक साधन वर्षा भी है। वर्षा द्वारा बरसने वाला पानी वायुमंडल की अनेक अशुद्धियों को अपने में घोल लेता है। उदाहरण के लिए वायुमंडल में व्याप्त धूल कण एवं अन्य अनेक धातुओं के महीन कण भी पानी में घुलकर पृथ्वी पर आते हैं। इसके अतिरिक्त वायु की अनेक अशुद्ध गैसें जो पानी में घुलनशील होती है, वर्षा के पानी में घोलकर पृथ्वी पर आ जाती है; जैसे – अमोनिया ।
    4. वातावरण की ऑक्सीजन :- वायु में ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा होती है, जो सभी वस्तुओं को जलाने में सहायक है। इस प्रकार ऑक्सीजन भी वायु को शुद्ध करने का कार्य करती है; क्योंकि यह वायु की अनेक अशुद्धियों को भस्म कर देती है। इसका एक रूप ओजोन भी है, जो एक तीव्र गैस है तथा उनके जीवाणुओं को मार देती है।
    5. तेज हवाएँ :- वायु का शुद्धिकरण तेज गति से बहने वाली हवाओं से भी होता रहता है। ये हवाएँ एक स्थान पर एकत्र होने वाली अशुद्धियों को तीव्र गति से उड़ा कर दूर क्षेत्रों में पहुंच जाती है। इससे वायु का शुद्धिकरण होता रहता है तथा संतुलन बना रहता है। यदि हवा न चले तो औद्योगिक क्षेत्रों का वातावरण इतना अधिक दूषित हो जाएगी कि यहां जीवित रहना ही असंभव  हो जाए।
    6. विसरण :-  विसरण का अर्थ है बहाना। वायु में उपस्थित रहने वाली गैस स्वयं ही बहा करती है। बहना या विसरण वायु का गुण है। जब किसी एक स्थान पर कुछ विषैली गैसें किसी कारण से एकत्रित हो जाती है तो वे स्वयं ही किसी भी अन्य दिशा में वह निकलती है और वायु शुद्ध बनी रहती है इस प्रकार विसरण से वायु शुद्ध बनी रहती है।
  • कृत्रिम साधन :- वैसे तो प्रकृति ने ही वायु के शुद्धिकरण के विभिन्न साधन उपलब्ध कराए हैं, परंतु क्योंकि मनुष्य ने विभिन्न प्रकार से वायु को सामान्य से अधिक मात्रा में दूषित करना शुरू कर दिया है अता वायुमंडल को कृत्रिम रूप से शुद्ध करने की भी आवश्यकता अवश्य अनुभव किया जाने लगा है । वायु को शुद्ध करने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित कृत्रिम साधनों को अपनाया जाता है –
    1. सभी मकानों एवं निवास स्थानों को बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हवा एवं सूर्य के प्रकाश की आने जाने की उचित व्यवस्था रहे।
    2. घरों में जहां अंगीठी आदि जलाई जाती है वहां से धुआं बाहर निकलने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए एक होती चिमनी लगा देनी चाहिए। जिससे दुआ एवं दूषित गैसें घर के अंदर एकत्रित ना हो पाए।
    3. यदि घरों पर पशु भी पाले जाते हो तो उन्हें अपने निवास से कुछ दूर ही रखना चाहिए। इससे उनके द्वारा उत्सर्जित मल मूत्र से उत्पन्न कैसे घर में एकत्र नहीं हो पाती।
    4. प्रत्येक बस्ती में पर्याप्त संख्या में पेड़ पौधे एवं वनस्पतियां लगानी चाहिए। यह वनस्पति वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को घटा ती है तथा ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाती है।
    5. खाली भूमि नहीं छोडनी चाहिए। खाली भूमि से धूल उड़ती है जो वायु प्रदूषित करती है।
    6. विभिन्न औद्योगिक संस्थानों तथा फैक्ट्रियों को आवासीय बस्ती से दूर रखना चाहिए तथा तथा उनकी धुआ निकलने वाली चिमनिया अत्यधिक ऊंचाई पर होनी चाहिए,जिससे दूषित गैसें वायुमंडल में नीचे की वायु को दूषित ना कर सकें।

उपसंहार :-

वायु प्रदूषण आने वाले कल के लिए और अधिक घातक हो जाएगा। जो हमारे जीवन के लिए बहुत ही कष्टकारी सिद्ध हो सकता है। अतः हमें आज से ही इस बात पर ध्यान रखना होगा कि हर व्यक्ति कम से कम मात्रा में वायु प्रदूषित करें तथा वे संसाधन जो वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं उनको कम से कम उपयोग करें।

इस प्रकार हम अपने वातावरण को शुद्ध कर सकते हैं जिसका उदाहरण हमने लॉकडाउन में देखा है। जिस समय पूरे देश में  लॉकडाउन  था किसी भी प्रकार के संसाधन फैक्ट्रियां यातायात के सभी साधन बंद होने के कारण वातावरण के स्वच्छ होने के संकेत प्राप्त हुए थे अतः हम कम संसाधन का उपयोग करके वातावरण को स्वच्छ कर सकती हैं।

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आशा करता हूं कि हमारे द्वारा लिखा गया वायु प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी आपको पसंद आया होगा। यह एक  Essay on Air Pollution in Hindi में लिखा गया है। जिसकी सहायता से आप अपने वायु प्रदूषण के निबंध को और अधिक बेहतर ढंग से लिख सकते हैं।

हमने इस Essay on Air Pollution in Hindi में वायु प्रदूषण से संबंधित सभी पहलुओं को एकत्रित करके बताया है। जिसमें वायु प्रदूषण के प्रकार, वायु प्रदूषण के कारण क्या है? वायु प्रदूषण पर टिप्पणी आदि सम्मिलित हैं।

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