Best Essay on Pollution in Hindi | प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

यदि आपको पर्यावरण में हो रहें प्रदूषण पर निबंध हिंदी में लिखना हैं तो हमारे द्वारा लिखे गए Essay on Pollution in Hindi को पढ़कर लिख सकते हैं।

इस प्रदूषण के निबंध को हम प्रस्तावना सहित लिखें हुए हैं यदि आपको प्रदूषण की समस्या पर निबंध 250 शब्द और इससे अधिक चाहिए तो आप अपने अनुसार इसे कम या ज्यादा कर सकते हैं। यह Hindi Essay on Pollution लगभग 2000 Word का लिखा गया हैं।

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2 An Essay on Pollution in Hindi | प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

प्रदूषण पर निबंध कैसे लिखें ?

सर्वप्रथम हम आपको बताएंगे कि पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध कैसे लिखे ?

प्रदूषण के निबंध की भूमिका या प्रस्तावना लिखें।

कम से कम 50 शब्दों में आप पर्यावरण में हो रहे प्रदूषण के बारे में बताएं और अपने निबंध की भूमिका को लिखें।

प्रदूषण क्या है ? अर्थ और परिभाषा लिखें।

पर्यावरण क्या होता है इसके बारे में बताएं अर्थ तथा परिभाषा को भी लिखें।

प्रदूषण के प्रकार, कारण और हानि लिखें।

अब आगे प्रदूषण के प्रकार और इनके कारण तथा हानि को आवश्यकतानुसार लिखें।

प्रदूषण से होने वाली समस्या और उसके समाधान को लिखें।

प्रदूषण से व्याप्त विभिन्न प्रकार की समस्याओं को बताते हुए इनकी समस्या का समाधान भी लिखिए।

निष्कर्ष या उपसंहार लिखें।

आप अपने द्वारा लिखे गए हिंदी में प्रदूषण पर निबंध के बारे में निष्कर्ष लिखें तथा इसकी एक सूक्ष्म विवेचना उपसंहार के रूप में लिखें।

अब हम उपरोक्त सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावना सहित एक सरल एवं सर्वोत्तम Essay on Pollution in Hindi में लिखेंगे।

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Write an Essay on Pollution in Hindi | हिंदी में निबंध पर्यावरण प्रदूषण पर

An Essay on Pollution in Hindi | प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

प्रस्तावना –

हमारी पृथ्वी पर बढ़ती हुई जनसंख्या और कल कारखानों की अधिकता ही पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण है। जब पृथ्वी पर जनसंख्या अधिक होगी तो वस्तुओं की मांग बढ़ेगी जिससे  उत्पादों की संख्या बढ़ेगी जिससे कल कारखानों की अधिकता होगी।

जिस कारण पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि स्वाभाविक बात है इसलिए पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए सर्वप्रथम जनसंख्या को सीमित रखना होगा।

पर्यावरण प्रदूषण की परिभाषा

किसी वस्तु या पदार्थ के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुण में हुए ऐसे परिवर्तन जिसके कारण वह वस्तु अथवा पदार्थ विशेषत: मनुष्य, वनस्पति एवं पर्यावरण के लिए हानिकारक हो पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है।

कोई भी वस्तु सदियों प्रदूषण उत्पन्न नहीं करती। अनावश्यक स्थान पर उसकी उपस्थिति अथवा अधिकता अथवा कमी की स्थिति में ये वस्तुएं प्रदूषण कारी हो जाते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ

प्रदूषण नये युग में महा त्रासदी का रूप धारण कर चुका है। वायु जल भोजन तथा ध्वनि प्रदूषण विश्व के नगरों में और बड़े कस्बों में अपनी विकराल शक्तियों व सीमाओं का प्रदर्शन कर रहा है। हमारे वन, जीव जंतु और जीवाणु संसार के छोटे-छोटे नागरिक भी इस त्रासदी के शिकार बनते जा रहे हैं।

प्रदूषण के कारण जीव, जंतु, वनस्पति की आयु में कमी आती है और मनुष्यों को असमय बीमारियों का सामना करना पड़ता है। जिससे बहुत सी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

प्रदूषण का अर्थ होता है कि हमारे पर्यावरण में दूषित पदार्थों की मात्रा की अधिकता  अर्थात वातावरण पूर्ण रूप से शुद्ध नहीं है। जिससे हमारा स्वास्थ्य सही नहीं होती है। जिससे संपूर्ण पृथ्वी की बीमारियों में वृद्धि होती है।

प्रदूषण क्या है ?

प्रदूषण शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है  पर्यावरण में दूषित पदार्थों की मात्रा का बढ़ना अर्थात हमारे पर्यावरण के घटकों जैसे ऑक्सीजन, कार्बन, नाइट्रोजन वायुमंडल में पाई जाने वाली समस्त गैसों की मात्रा में कमी या ज्यादा ही पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है। 

वायुमंडल में दूसरी पदार्थों का मिश्रण जो पृथ्वी के जीव- जंतु, वन संपदा की वृद्धि दर में कमी करते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। यह सभी कारक पर्यावरण प्रदूषक  कहलाते हैं।

प्रदूषण के प्रकार

पर्यावरण में पाए जाने वाले सभी प्रकार के जैविक, अजैविक घटक जिनके कारण प्रदूषण उत्पन्न होता है वह पर्यावरण प्रदूषण के अंतर्गत आते हैं।

  1. जल प्रदूषण
  2. वायु प्रदूषण
  3. ठोस व्यर्थ प्रदूषण
  4. ऊष्मीय प्रदूषण
  5. ध्वनि प्रदूषण
  6. रेडियोधर्मी प्रदूषण
  7. भू प्रदूषण
  8. जनसंख्या प्रदूषण

01 – जल प्रदूषण

जल प्रकृति की एक अनूठी देन है प्राचीन काल से मानव सभ्यताएं पानी के स्रोतों के आसपास ही पनपती रही है। जल को जीवनदायिनी कहना उचित होगा।

पृथ्वी पर लगभग 70% भाग पर पानी है। जिसमें से 97% जल खारा पानी है। 3% जल पीने या मानव व वनस्पति के अनुकूल है।

दिन प्रतिदिन पानी की मांग जनसंख्या वृद्धि औद्योगिक वृद्धि एवं उपयोग के दौरान व्यर्थ पानी की वृद्धि आज के कारण बढ़ती जा रही है पानी के स्रोत सीमित होने के कारण इसका सीमित मात्रा में उपयोग करना आवश्यक है।

जब जल में कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ खुल जाते हैं तब जल प्रदूषित हो जाता है जैसे एसिड एल्किल और इन ऑर्गेनिक साल्ट आज जल में खुलकर जल का रंग स्वाद नष्ट कर देते हैं।

02 – वायु प्रदूषण

वायु सभी जीव जंतु की एक अति आवश्यक तत्व के रूप में उनके जीवन के लिए आवश्यक है। जीव जंतु श्वसन क्रिया के द्वारा जीवित रहते हैं। यह श्वसन क्रिया केवल शुद्ध वायु में ही संभव है। अतः वायु सभी जीव धारियों की प्रथम आवश्यकता है।

शुद्ध वायु में विभिन्न प्रकार के पार्टिकुलेट पदार्थ जैसे गैस, वाष्प एवं गंध आदि का समावेश एवं निश्चित मात्रा में होता है। परंतु इस औद्योगिक विकास वाहनों के कारण वायु में उनके दुआओं में निकाली हानिकारक पदार्थ जिससे मानव के श्वसन क्रिया में बहुत नुकसान भी होता है।

यह अपशिष्ट पदार्थ वायु में मिल जाने के कारण वह प्रदूषित हो जाता है जिसके संपूर्ण तत्वों के नष्ट हुआ अनावश्यक तत्वों के मिश्रण के कारण होता है। जो मानव जीवन के लिए बहुत नुकसान देय होता है।

03 – ठोस व्यर्थ प्रदूषण

सॉलि़ड वेस्ट वे बेकार पदार्थ है जो मनुष्य द्वारा स्वयं विभिन्न क्रियाओं में उपयोग कर, उन्हें बेकार व अवांछित समझकर फेंक देते हैं। इसमें कृषि,औद्योगिक व खनन आदि का दोष व्यर्थ पदार्थ भी होता है।

इन व्यर्थ पदार्थों की मात्रा एक शहर से दूसरे शहर,एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है। यह उस स्थान की भौगोलिक स्थिति,मौसम सामाजिक सामाजिक रहन-सहन व आर्थिक दशा पर निर्भर करती है।

04 – ऊष्मीय प्रदूषण

घरों, उद्योग, थर्मल एवं विद्युत पावर प्लांट में ऊर्जा की एक बहुत बड़ी मात्रा का उपयोग किया जाता है। एक बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उपयोग होने के बाद कुछ और जमीनों से गैस के रूप में हुए के रूप में या पानी के रूप में बाहर निकलते हैं।

गैस या धुँए के रूप में यह केवल वातावरण को ही गंदा नहीं करती है अपितु उसके तापमान में भी परिवर्तन करते हैं।

05 – ध्वनि प्रदूषण

आज के इस युग में संसार में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वस्तुएं एक प्रमुख स्थान ले चुकी है। शहर तो इनकी चपेट में पूर्णतया आ चुके हैं। अत्यधिक ध्वनि करते हो हुए हवाई जहाज, लाउडस्पीकर, सायरन, कारखानों में चालू स्थिति में मशीन ने वाहनों टेलीविजन और रेडियो मनुष्यों के सामूहिक वार्तालाप आदि शोर के स्रोत है।

ऐसे ध्वनि जैसे अनाउंसिंग खींच हो, चिड़चिड़ापन हो आदि सब शोर कहलाता है। रुक-रुक कर होने वाला शोर भी परेशान करता है। शोर की इकाई बेल में नापी जाती है। मनुष्य 0 डेसीबल की तीव्रता सुन सकता है लगभग 25 डेसीबल तक शांत का वातावरण रहता है। 25 डेसीबल से अधिक तीव्रता हानिकारक होती है।

06 – रेडियोधर्मी प्रदूषण

लकड़ी, कोयला, डीजल, पेट्रोल एवं वैद्युत का उपयोग विभिन्न रचनात्मक कार्यों में इंधन या ऊर्जा के रूप में होता है। परंतु जब कुछ विशिष्ट कार्यों में जैसे मिसाइल रॉकेट, अणु बम,परमाणु बम एवं हाइड्रोजन बम आदि बनाने में अनेक संचालन एवं नियंत्रण में नाभिकीय ऊर्जा प्रयोग में लाई जाती है।

इस ऊर्जा का कुछ भाग वैद्युत बनाने में कुछ भाग अन्य कार्यों में तथा शेष भाग विकिरण के रूप में वातावरण में रहता है। जो जीवो वनस्पतियों तथा जनसमूह आदि पर घातक प्रभाव डालते हैं। साथ साथ जलवायु एवं पृथ्वी को भी प्रदूषित करती है।

07 – भू प्रदूषण

किसानों द्वारा फसलों की उपज बढ़ाने के लिए खाद का उपयोग एवं फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए कीटनाशक का उपयोग करते हैं।

यह दवाइयां इतनी अधिक जहरीली होती है कि यह खेतों में डालनी के बाद इनकी संपूर्ण मात्र का उपयोग नहीं हो पाता है और यह भूभाग को प्रदूषित कर देती हैं जिससे आने वाले समय में खेतों की उर्वरकता कम हो जाती है।

08 – जनसंख्या प्रदूषण

जनसंख्या में वृद्धि प्रदूषण का मुख्य कारण है। जनसंख्या के द्वारा उस स्थान की दोहन प्रक्रिया बहुत तेजी से शुरू हो जाती है जिससे वहां के वातावरण की शुद्धता में कमियां आने लगती है।

जनसंख्या वृद्धि के कारण वनों की कटाई तेजी से होने लगती है जो वातावरण की शुद्धता में कमी का कारण बनता है।

प्रदूषण के कारण

प्रदूषण के विभिन्न घटक होने के कारण इसके घटकों को ही प्रदूषण का कारण अथवा तत्व माना जाता है।

01 . बढ़ती हुई जनसंख्या

बढ़ती हुई जनसंख्या किसी भी देश या राज्य के लिए एक बहुत बड़ा प्रदूषण कारण होता है। जनसंख्या की अधिकता राज्य के प्रदूषण के लिए विशेष घटक के रूप में माना जाता है। जनसंख्या अधिक होने पर उस स्थान पर वस्तुओं की मांग बढ़ती है। जिससे वहां पर उत्पादों में बढ़ोतरी की जाती है और उत्पादन की अधिकता प्रदूषण का कारण बनता है।

02 . वृक्षों की अंधाधुंध कटाई

आज के युग में वृक्षों की कटाई जितनी तेजी से हो रही है इतनी तेजी से वृक्ष लगाए नहीं जा रहे हैं अत:  इस कारण वृक्षों के द्वारा मिलने वाले ऑक्सीजन की मात्रा में कमी हो रही है और प्रदूषण में वृद्धि हो रही है। जिससे पृथ्वी का तापमान भी  बढ़ रहा है।

03. यातायात साधनों में वृद्धि –

ईंधन से चलने वाली यातायात साधनों के कारण उनके द्वारा उत्सर्जित गैसों के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। क्योंकि यह गैसें पूर्ण रूप से जली नहीं होती है इससे मानव व जीव जंतु के द्वारा सांस लेने पर यह उनके शरीर में प्रवेश कर जाती है।

जिसके द्वारा हृदय रोग उत्पन्न होता है अतः यातायात की अधिकता पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारणों में से एक है जिसमें ईंधन से चलित वाहन मुख्य कारण होते हैं। अतः पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें E वाहनों का उपयोग करना चाहिए।

04. कल कारखानों की अधिकता –

बढ़ती जनसंख्या के कारण व्यक्तियों द्वारा अधिक वस्तुओं की मांग होती है जिससे कारखानों में अधिकता आती है और कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ जो पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं ।

इन पदार्थों का रखरखाव कारखानों के द्वारा उचित रूप से न किए जाने के कारण यह हमारे नदियों, वातावरण और मृदा में मिल जाते हैं जिससे यह सारी चीजें प्रदूषित हो जाती हैं और हम इनका उपयोग करने पर बीमारी के शिकार हो जाते हैं।

05. रेडियोएक्टिव पदार्थों की उपयोगिता में वृद्धि –

वर्तमान समय में बिजली का निर्माण करने के   लिए सबसे अधिक रेडियोएक्टिव पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है जिससे हमें अधिक मात्रा में बिजली तो प्राप्त हो जाती है परंतु इसकी द्वारा निकलने वाली विकिरण हमें नुकसान पहुचते हैं।

अतः बिजली निर्माण कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए की रेडियोएक्टिव पदार्थों का संरक्षण सही तरीके से कर रहे हैं अथवा नहीं।

आज के युग में प्रदूषण की समस्या

आज के आधुनिक युग में बढ़ती हुई जनसंख्या पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का एक प्रमुख कारण बन गया है। अर्थात जिस स्थान का जनसंख्या अधिक होगा उस स्थान का प्रदूषण भी अधिक होगा  कम जनसंख्या वाले स्थान का वातावरण शुद्ध व प्रदूषण रहित होगा।

आधुनिक युग में बढ़ते हुए वैज्ञानिक अन्वेषण और सुख-सुविधाओं की विधि में हुए आधुनिकीकरण के कारण प्रदूषण की समस्या एक विकराल रूप धारण कर चुकी है अर्थात आधुनिक युग में प्रदूषण का मुख्य कारण जनसंख्या वृद्धि, सुख सुविधाओं की अधिकता और पेड़ पौधों की अंधाधुंध कटाई मुख्य कारण है।

पर्यावरण संरक्षण डेटा के अनुसार आज से 10 साल पूर्व विभिन्न शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स के परिणाम और आज के समय  हम उन शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स के परिणाम की तुलना करने पर दोनों समय की एयर क्वालिटी इंडेक्स में बहुत बड़ा अंतर दिखाई देता है। इससे हमें यह पता चलता है कि समय के बढ़ने के साथ पर्यावरण प्रदूषण की अधिकता हो गई है ।

प्रदूषण की समस्या का समाधान

हम अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को कम कर सकते हैं। जिसके लिए हमें उचित जीवन शैली का उपयोग करने की आवश्यकता है।

01. जनसंख्या को स्थिर करके

जनसंख्या को स्थिर करके हम प्रदूषण को कम कर सकते हैं जिससे वस्तुओं की मांग में स्थिरता आएगी और उत्पादन में भी कमी आएगी जो पर्यावरण प्रदूषण में कमी का एक विशेष कारण बन सकता है।

02. वनों की कटाई को कम करके, अधिक से अधिक वृक्षों को लगाकर

वनों की कटाई के लिए हमें कठोर कानून बनाने होंगे वनों की कटाई को कम करना होगा जिससे ऑक्सीजन की उचित मात्रा में पौधों से प्राप्त हो सके और जितने वृक्ष कर चुके हैं उनके लिए हमें तेजी से पौधों को लगाना होगा उनकी देखभाल करनी होगी जिससे भी सुरक्षित और वृक्ष का रूप धारण कर सकें।

03. ईंधन वाले यातायात साधनों के उपयोग में कमी करना, बैटरी वाले साधनों का उपयोग करना

ईंधन वाले साधनों से निकलने वाले धुएं पर्यावरण को बहुत ही प्रदूषित करते हैं जिन्हें कम करके हम पर्यावरण को सुरक्षित कर सकते हैं। ई वाहनों के द्वारा हम पर्यावरण में प्रदूषण रहित वाहनों का भी उपयोग कर सकते हैं जिनके द्वारा किसी भी प्रकार के धुए का उत्सर्जन नहीं होता है।

04. कल कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों का सही से रखरखाव करके

कल कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों का किस प्रकार से नष्ट किया जा सके जिससे पर्यावरण पर  किसी भी प्रकार का दोष  ना उत्पन्न हो। इसके लिए हमें कंपनियों को बहुत ही कड़े दिशा-निर्देश देने चाहिए जिससे वे अपने अपशिष्ट पदार्थों का निष्पादन अच्छे से कर सकें।

05. रेडियोएक्टिव तत्व की उपयोगिता में कमी लाना

रेडियोएक्टिव पदार्थ पर्यावरण के लिए बहुत ही हानिकारक है। इसकी उपयोगिता में हमें कमी लाने की बहुत ही जरूरत है। इसलिए हमें इसके रखरखाव पर विशेष ध्यान रखना होगा इसके द्वारा निकलने वाले विकरण को पर्यावरण में जाने से रोकने के लिए इसे एक सुरक्षित स्थान पर रखने की आवश्यकता है जिसके लिए सरकार के द्वारा बहुत ही विशेष दिशा निर्देशों का दिया जाने की आवश्यकता है।

 शहर तथा गांव के प्रदूषण की तुलना

शहर का प्रदूषण

शहर के मुकाबले गांव में कम प्रदूषण होता है जिसका सबसे प्रमुख कारण यातायात होता है और पेड़ों की कमी । शहर में शहर में पेड़ों की कमी होती और यातायात की अधिकता होती है जिसके कारण शहर की वायु में अनेक घोषित कर मिल जाते हैं और यहां का प्रदूषण गांव की अपेक्षा अधिक हो जाता है।

गांव का प्रदूषण

गांव में पेड़ पौधों की अधिकता होती है तथा यहां पर किसी भी प्रकार के कल कारखाने नहीं होते हैं और यहां पर यातायात की भी कमी होती है जिसके कारण गांव का प्रदूषण शहर के प्रदूषण से कम होता है इसलिए यहां के लोग शहर के लोगों की अपेक्षा अधिक स्वस्थ होते हैं ।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986

वायु प्रदूषण की रोकथाम तथा नियंत्रण एक्ट 1981 में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु पारित किया गया था। इस एक्ट के विद्यमान होने के बाद भी यह पाया गया की कि प्रदूषण की समस्या कब नहीं हो रही है बल्कि खतरनाक अनुपात में बढ़ रही है।

अतः 1972 की स्टॉकहोम कॉन्फ्रेंस में लिए गए निर्णय को पूर्ण रूप से प्रभाव में लाने की हेतु अधिक बोधगम्य, स्पष्ट एवं सामान्य कानून का निर्माण पर्यावरण सुरक्षा एक्ट 1986 के रूप में किया गया। भारत में यह एक 19 नवंबर 1986 को अधिकारिक गजट में मुद्रित एक अधिसूचना संख्या जी• एस• आर• 1198 दिनांक 12 नवंबर, 1986 के द्वारा लागू किया गया है।

उपसंहार

पर्यावरण की रक्षा करना हमारा कर्तव्य होता है। लिए हमेशा भी नियमों का पालन करना चाहिए। सरकार के द्वारा बनाए गए नियमों को दूसरों को बताना भी चाहिए तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए आंदोलन चलाकर लोगों को जागरूक भी करना चाहिए।

अतः जिस प्रकार से लॉकडाउन में पर्यावरण की स्थिति में बहुत ही अधिक मात्रा में सुधार हुआ था परंतु जैसे-जैसे कारखाने एवं वाहन आदि पुनः चलने लगी फिर से वातावरण की हालत खराब होने लगी है अतः हमें अवश्य समझ सकते हैं कि हम अपनी आवश्यकताओं को कम करके पर्यावरण को संरक्षित अवश्य कर सकते हैं।

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हमारे द्वारा लिखा गया प्रदूषण पर निबंध हिंदी में आपको कैसा लगा इसकी राय आप Comment Box के माध्यम से आप जरूर दें। यदि आपको किसी भी और बिन्दु पर निबंध हिंदी में चाहिए तो आप उसे अवश्य बताएं।

यदि आपको Essay writing करना Pollution पर Hindi में तो यह निबंध आपके लिए एक प्रेरक का काम करेगा। जिसे पढ़ कर आप को Essay on Pollution in Hindi के एक प्रारूप के बारे में पता चल जाएगा।

प्रदूषण की समस्या पर निबंध आपको कई रूपों में लिखने के लिए मिलता हैं। जैसे – 250 शब्द, 500 शब्द में प्रदूषण पर निबंध लिखें। इन्हें को ध्यान में रखते हुए हमने इस निबंध को लगभग 2000 शब्दों का लिखा है। जिसे आप अपने समाज के अनुसार छोटा या बड़ा कर सकते हैं। प्रदूषण पर लेख के लिए यह सबसे उचित हैं।

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