Best Essay on Water Pollution in Hindi | जल प्रदूषण पर निबंध हिन्दी में

जल प्रदूषण एक बहुत ही बड़ी समस्या वर्तमान समय में हैं। इस पर Essay on Water Pollution in Hindi में आप यहाँ से देखकर निबंध लिख सकते हैं।

जल हमारे लिए जीवन है मानव शरीर के लिए यह बहुत ही आवश्यक तत्व है। हम जो पेड़ पौधे लगाते हैं तथा जो अनाज लगाते हैं उसके लिए जल एक आवश्यक घटक के रूप में होता है। आधुनिक युग में इसका उपयोग अनेक कार्यों जैसे साफ सफाई वह किसी वस्तु को बनाने में अधिक मात्रा में उपयोग किया जा रहा है।

प्राचीन काल में मानव जाति शुद्ध जल के स्रोत के इर्द-गिर्द बसी हुई थी। पृथ्वी पर पानी की मात्रा निश्चित है जिसका दुरुपयोग,आने वाले समय में बहुत बड़े संकट की ओर संकेत कर रहे हैं। आज पानी का संकट विश्व के अनेक देशों में बहुत ही विकराल समस्या लेकर उत्पन्न हुआ है।

आज भी भारत के अनेक क्षेत्रों में पीने के शुद्ध जल की बहुत बड़ी समस्या है। कुछ स्थानों पर लोगों को पानी लेने के लिए रोजाना 10 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर का 2020 का एक अध्ययन करता है की 2050 तक 30 भारतीय शहर पानी का गंभीर संकट झेल रहे होगे। 

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Best Essay on Water Pollution in Hindi for School and College

प्रस्तावना एवं उपसंहार सहित जल प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | A Essay on Water Pollution in Hindi

नीचे आपके लिए जल प्रदूषण पर एक निबंध लिखा गया है जिसमें जल प्रदूषण के प्रकार तथा जल प्रदूषण की परिभाषा एवं जल प्रदूषण से होने वाली समस्या के बारे में बताया गया है इस Essay on Water Pollution in Hindi में जल प्रदूषण के सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं की विवेचना की गई है।

प्रस्तावना :-

जल के मुख्य स्रोतों में दूषित एवं विषैले तत्वों का समावेश होना जल प्रदूषण कहलाता है। यह भी आज के युग की एक गंभीर समस्या है। इसका अत्यधिक बुरा प्रभाव मानव समाज प्राणी जगत तथा वनस्पति जगत पर पड़ता है।

जल प्रदूषण के परिणाम स्वरूप अमेरिका की विशाल ईरी झील लगभग निर्जीव हो चली है तथा फ्रांस की राइन नदी भी अभी एक बहुत गंदा नाला एवं दुर्गंध का बहता हुआ भण्डार बन गई है। भारत में विभिन्न स्थानों पर गंगा नदी तथा दिल्ली का आगरा में यमुना का जल विषैला हो रहा है। गोमती गोदावरी की भी यही स्थिति है।

नदियों तालाबों के अतिरिक्त समुद्र का जल भी बहुत अधिक दूषित हो चुका है। औद्योगिक नगरों में होने वाली वर्षा का जल भी वायुमंडल की अशुद्धियों के कारण प्रदूषित होता है। वर्षा के जल में अनेक बार तेजाब की काफी मात्रा पाई जाती है। इसके अतिरिक्त विभिन्न कारणों से भूख जल भी कुछ हद तक प्रदूषित होने लगा है।

जल प्रदूषण क्या होता है व जल प्रदूषण की परिभाषा :-

जल (पानी) जिसका रासायनिक सूत्र H2O होता है।जल का ph मान 7 (उदासीन) होता है। किसी भी जल का यदि पीएच मान 7 है व उदासीन है उसमें किसी भी प्रकार की गंध नहीं है तथा वह स्वादहीन है तो वह जल शुद्ध माना जाता है।

इस प्रकार यदि जल की शुद्धता कम है या उसमें अम्ल और क्षार की मात्रा अधिक है तो वह जल प्रदूषित माना जाता है अतः जल के ph मान में कम या  ज्यादा होने पर जल को प्रदूषित कहा जाता है इस प्रकार जल में अनेक अशुद्धियों के मिलने के कारण जल प्रदूषित हो जाता है।

जल प्रदूषण को उत्पन्न करने वाले कारक या जल प्रदूषण के प्रकार :-

प्रकृति के द्वारा – बर्फ पिघलने से एवं तेज वर्षा के समय सिल्ट और बालू जल के साथ बह कर तालाबों झीलों और नदियों के पानी में मिलकर जल को प्रदूषित करते हैं।

कृषि कारकों के द्वारा – फसलों की उपज बढ़ाने के लिए आजकल रासायनिक खादों और कीटनाशक का उपयोग किया जाने लगा है। जिसमें फास्फेट क्वामा नाइट्रेट हुआ यूरिया आदि मुख्यता उपयोग में लाई जा रही है और कीटाणु ना सको में अनेक दवाइयों का उपयोग किया जा रहा है।

वर्षा जल के साथ यह पदार्थ मिट्टी में खुल कर सृष्टि जल स्रोतों को प्रदूषित ही नहीं वरन जहरीली बनाती हैं। यही जल्द जब वह कर नदियों में मिलता है तो भूमिगत जल को प्रदूषित कर देता है।

खनन कार्यों के द्वारा – खनिज प्राप्त करने के लिए जमीन में विभिन्न गहराइयों तक खुदाई होने पर मिट्टी एवं अन्य अशुद्धियों के साथ खनिज प्राप्त होता है शुद्ध खनिज प्राप्त करने के लिए धुलाई की क्रिया करनी होती है जिससे धूल मिट्टी एवं अन्य घुलनशील तथा अम्ल से लवण पानी के साथ बहकर निस्तारित नालियों में मिल जाते हैं जिससे नालियों काजल पूर्ण रूप से प्रदूषित हो जाता है।

औद्योगिक कार्यों के कारण – अधिकतर उद्योग अपने उत्पाद निर्माण प्रक्रिया में जल का उपयोग करते हैं या जल रासायनिक प्रक्रियाओं के द्वारा अपघटन क्रिया करके जल प्रदूषित करने लगते हैं जिसके द्वारा यह जल प्रदूषित हो जाते हैं और इन्हीं नदियों में छोड़ देने से नदियों के जल भी प्रदूषित हो जाती हैं।

जल प्रदूषण के स्रोत :-

सामान्य शब्दों में कहा जाता है कि जल का दूषित होना ही जल प्रदूषण है। जो स्वयं में एक यौगिक है जिसमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन मुख्य घटक होते हैं। शुद्ध जल का रासायनिक सूत्र है -H2O  शुद्ध जल रंगहीन ,स्वादहीन एवं स्वाभाविक चमक युक्त होता है।

यह एक अच्छा विलायक है जिसमें विभिन्न पदार्थ शीघ्र ही घुल जाते हैं। इस कारण से किसी भी विजातीय तथा हानिकारक पदार्थ का जल स्रोतों में मिल जाना अथवा घुल जाना जल प्रदूषण का कारण बन जाता है।

व्यवहारिक रूप में हम कह सकते हैं कि जल में किसी प्रकार की गंदगी रसायन तत्व धातु का यौगिक आवश्यक तथा रोगाणुओं का मिल जाना ही जल प्रदूषण है। इसके मुख्य कारणों एवं स्रोतों का परिचय निम्नवत है –

  • घरेलू वाहित मल (सीवेज) – इसमें मल मूत्र, घरेलू गंदगी तथा कपड़ों को धोने के बाद का बचा जल आदि सम्मिलित होते हैं। इन्हें प्रायः उन नदियों के जल में मिला दिया जाता है जिनके किनारों पर ये गांव, कस्बे, नगर आदि बसे होते हैं।
  • इसके परिणामस्वरूप बस्तियों के किनारे की नदियों,झील आदि के जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। वाहित मल से अनेक प्रकार के कीटाणु जल में आ जाते हैं जिनके कारण विभिन्न प्रकार के रोग फैलते हैं।
  • वर्षा का जल – वर्षा का जल खेतों की मिट्टी की ऊपरी परत को बहाकर नदियों झीलों तथा समुद्रों तक पहुंचाता है। इसके साथ अनेक प्रकार की खाद (नाइट्रोजन एवं फास्फेट के यौगिक) एवं कीटनाशक पदार्थ भी जल में पहुँच जाते हैं जिससे जल प्रदूषित हो जाता है।
  • औद्योगिक संस्थानों द्वारा विसर्जित पदार्थ – औद्योगिक संस्थानों द्वारा विसर्जित पदार्थों में अनेक विषैले पदार्थ (अम्ल,क्षार,सायनाइड आदि) रंग रोगन चमड़े व कागज उद्योग द्वारा विसर्जित पारी मरकरी के यौगिक रासायनिक एवं पेस्टिसाइड उद्योग द्वारा विसर्जित शीशे लेड के औद्योगिक तथा कॉपर व जिंक के योगिक प्रमुख हैं यह सभी अवशेष जल स्रोतों को निरंतर प्रदूषित करते रहते हैं।
  • तेल द्वारा प्रदूषण- इस प्रकार का प्रदूषण समुद्र के जल में या तो जहाज द्वारा तेल विसर्जित करने से होता है अथवा समुद्र के किनारे स्थित तेल शोधक संस्थानों के कारण होता है।
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण – नाभिकीय विखंडन के फल स्वरुप रेडियोधर्मी पदार्थ जल को दूषित कर देते हैं। इस प्रकार का प्रदूषण प्रायः समुद्र के जल में होता है।
  • शव विसर्जन – हमारे समाज में विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के कारण मृतक व्यक्तियों के शव को अस्थियों को चिता की राख आदि को नदियों में विसर्जित कर दिया जाता है इनसे भी जल प्रदूषण में वृद्धि होती है

उपर्युक्त वितरण द्वारा जल प्रदूषण के मुख्य कारणों का सामान्य परिचय प्राप्त हो जाता है। इनके अतिरिक्त विभिन्न कारणों से होने वाले वायु प्रदूषण तथा मृदा प्रदूषण की वृद्धि में कुछ ना कुछ योगदान अवश्य देते हैं। वास्तव में प्रदूषित वायु एवं प्रदूषित मिट्टी के संपर्क में आने वाला जल्दी प्रदूषित हो जाता है।

जल प्रदूषण का जन स्वास्थ्य पर प्रभाव :-

जल प्रदूषण का भी प्रतिकूल प्रभाव मानव के स्वास्थ्य पर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 500000 से अधिक बच्चे जल प्रदूषण के परिणाम स्वरूप उत्पन्न बीमारियों से मर जाते हैं तथा 50% से अधिक लोग केवल प्रदूषित जल के सेवन के कारण ही बीमार होते हैं। प्रदूषित जल के सेवन से मुख्य रूप से पाचन तंत्र संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं इनमें मुख्य हैं हैजा, पेचिश, टाइफाइड, पैराटायफाइड आदि। यह सभी रोग संक्रामक रूप से फैलते हैं तथा घातक सिद्ध होते हैं।

प्रदूषित जल एक अन्य प्रकार से विभिन्न मनुष्य को प्रभावित करता है। हम जानते हैं कि असंग लोग मांसाहारी हैं तथा मांस प्राप्ति का एक मुख्य स्रोत मछलियां तथा अन्य जल जीव हैं जब जल प्रदूषित हो जाता है तब इन मछलियों की शरीर में भी अनेक विषैले तत्वों का समावेश हो जाता है तथा ऐसे जीवो का मांस खाने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

विभिन्न रसायनों से प्रदूषित समुद्री जल में रहने वाली मछलियों को खाने से अंधेपन तथा मस्तिष्क संबंधित रोगों की आशंका रहती है। जल प्रदूषण से हमारी फसलें भी प्रभावित होती हैं। प्रदूषित जल द्वारा संचित फसलों को खाने से मनुष्य तथा अन्य प्राणियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

जल प्रदूषण से जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को निम्नांकित तालिका में दर्शाया गया है –

जल प्रदूषकजन स्वास्थ्य पर प्रभाव
कीटाणु एवं कीटनाशक, जैसे – डीडीटी, पीसीबी आदि।मस्तिष्क पर कुप्रभाव, जिगर (लीवर) का कैंसर।
लेड (Pb) वह मरकरी एचडी के यौगिक।मानव व प्राणी तंत्रिका तंत्र पर विषैला प्रभाव, अधिकता से मृत्यु।
मनुष्य द्वारा वाहित मल।मनुष्य में विभिन्न रोग जैसे – टाइफाइड हैजा पेचिश पीलिया आदि।
तैलीय प्रदूषक; जैसे – पेट्रोल, इथाईलीन आदि।बड़ी संख्या में मछलियों की मृत्यु से आर्थिक क्षति। कुप्रभावित मछलियों पर अन्य समुद्री जीवो को खाने से अनेक रोगों की संभावना।
रेडियोधर्मी पदार्थ; जैसे – कार्बन 14 इत्यादि।रेडियोधर्मी जल अथवा जलीय प्राणियों के सेवन से ये पदार्थ मानव शरीर में पहुंचकर ल्यूकेमिया व कैंसर जैसे भयानक रोग उत्पन्न करते हैं।
जल प्रदूषक एवं उनका जन स्वास्थ्य पर प्रभाव

जल प्रदूषण को नियंत्रित करने  के उपाय :-

जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं –

  • कूड़े करकट, गंदगी व मल मूत्र आदि काजल में विसर्जन प्रतिबंधित होना चाहिए।
  • सीवर प्रणाली का विस्तार होना चाहिए। सीवर के जल को नगर के बाहर किसी उपयुक्त स्थान पर दोष रहित करने के पश्चात नदी आदि में प्रवाहित करना चाहिए।
  • मृतक प्राणियों अथवा उनकी राख का जल में विसर्जन प्रतिबंधित करना चाहिए।
  • उद्योग एवं कारखानों के संचालकों को स्पष्ट व कठोर आदेश होना चाहिए कि वे अपने अवशिष्ट पदार्थों के विसर्जन का उचित प्रबंध करें तथा किसी भी स्थिति में उन्हें जल स्रोतों तक न जाने दें।
  • जनों के शुद्धिकरण के लिए जल स्रोतों में मछलियां, शैवाल तथा अन्य जलीय पौधे उगाए जाने चाहिए।
  • डीडीटी एवं एल्ड्रिन जैसे विषैले पदार्थों का उपयोग प्रतिबंधित किया जाना चाहिए यदि प्रतिबंधित किया जाना संभव न हो तो उन्हें सीमित अवश्य किया जाना चाहिए ।
  • नदियों,झीलों एवं तालाबों के किनारों पर वस्त्र आदि नहीं धोना चाहिए। साबुन का उपयोग करने से लगभग 40% जल प्रदूषित हो जाता है।
  • विषैले प्रदूषण (जैसे – लेड, मरकरी व कीटनाशक आदि) को नदियों द्वारा समुद्र तक पहुंचने से रोकने के उपाय किए जाने चाहिए।
  • परमाणु भट्टी  एवं नाभिकीय विखंडन के प्रयोग को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए तथा किसी भी स्थिति में समुद्र के जल को रेडियोधर्मी प्रदूषण से मुक्त रखना चाहिए।
  • प्रदूषण संबंधी आवश्यक शिक्षा का प्रसार होना चाहिए, जिससे कि प्रत्येक नागरिक प्रदूषण की रोकथाम के कार्यक्रम में निजी योगदान दे सके। पर्यावरण शिक्षा को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 :-

जल प्रदूषण की रोकथाम तथा जल नियंत्रण एक्ट 1974 जो 23 मार्च 1974 को उन राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया जिसके लिए निर्माण किया गया था एक्ट का मुख्य उद्देश्य जल प्रदूषण को रोकना था।वास्तव में देखा जाए तो जल प्रदूषण एक अभिशाप है जिसे सार्वजनिक हित के लिए रोका तथा नियंत्रित किया जाना आवश्यक है।

यह सभी राज्य तथा केंद्र शासित राज्यों पर समान रूप से लागू होता है आप के उद्देश्यों का संचालन केंद्र तथा राज्य बोर्ड जैसे प्राधिकरण की स्थापना की गई है जिन्हें एक्ट के अंतर्गत विभिन्न कार्य तथा सत्ता अधिकारी प्रदान किए गए हैं एक्ट की धारा 5(1) तथा 5(2) के अनुसार केंद्रीय और राज्य सरकार अधिकारी गजट की अधिसूचना के द्वारा केंद्रीय जल प्रयोगशाला अथवा राज्य जल प्रयोगशाला की स्थापना किया गया है।

फैक्ट्री में कुछ सुझाव या उपाय बताए गए हैं एप्प में प्रत्येक व्यक्ति पर अपने प्रावधान में प्रदत्त किसी भी निर्देश अथवा आदेश का पालन करने का उत्तरदायित्व निर्धारित किया गया है जिन का अनुपालन न किए जाने पर दंडित किए जाने का प्रावधान है।

उपसंहार :-

जल प्रदूषण पृथ्वी के लिए बहुत ही हानिकारक है। जल प्रदूषण से अपनी पृथ्वी की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। जल प्रदूषण को कम अथवा समाप्त करने के लिए हमारी सरकार द्वारा अधिक से अधिक जागरूकता कैंप व विज्ञापन का उपयोग करना चाहिए ।

जल प्रदूषण को कम करने के लिए हम अपने अपशिष्ट पदार्थों का सही प्रकार से उसमें से अशुद्धियों को अलग करके ही प्रदूषण को कम कर सकते है। हमें अपने जीवन शैली में भी बदलाव लाने की आवश्यकता है,जैसे पशुओं को नदी में ना लगाएं नदी में साबुन इत्यादि का उपयोग न करें । अतः इन सभी प्रक्रियाओं के द्वारा हम अपने जल को पुनः स्वच्छ कर सकते हैं । 

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